डायरेक्ट टैक्स 23% बढ़ा, फिर भी भारत की GDP रैंकिंग चौथे से छठे स्थान पर क्यों खिसकी
रुपये की कमजोरी और GDP के बेस ईयर में बदलाव से भारत IMF की रैंकिंग में जापान और ब्रिटेन से पीछे हुआ, जबकि टैक्स वसूली रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है

संसद के मानसून सत्र में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा को बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में चौथे से खिसककर छठे स्थान पर आ गई है। इसी दौरान वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 23% बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।
IMF की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में भारत की नॉमिनल GDP 3.92 ट्रिलियन डॉलर (373.80 लाख करोड़ रुपये) रही, जिससे भारत छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। रैंकिंग गिरने की दो वजहें हैं—पिछले एक साल में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 9% कमजोर हुआ, जिससे डॉलर में GDP छोटी दिखी, जबकि रियल GDP ग्रोथ 6.5% रही। दूसरी वजह फरवरी 2026 में GDP का बेस ईयर 2011-14 से बदलकर 2022-23 करना रहा, जिससे नई गणना में नॉमिनल GDP पहले से कम आई और ब्रिटेन भारत से आगे निकल गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5.12% बढ़कर 23.40 लाख करोड़ रुपये रहा था, जो सरकार के रिवाइज्ड अनुमान 24.21 लाख करोड़ रुपये से कम था। लेकिन 10 अगस्त 2026 तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 23.09% बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पार कर गया, जबकि ग्रॉस कलेक्शन 19.75% बढ़कर करीब 9.55 लाख करोड़ रुपये हो गया। कॉरपोरेट टैक्स 19.83% और पर्सनल इनकम टैक्स 23% बढ़ा, जबकि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में 51% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 26.97 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रैंकिंग में गिरावट अर्थव्यवस्था के कमजोर होने की नहीं, बल्कि करेंसी के उतार-चढ़ाव की वजह से है। डायरेक्ट टैक्स अब GDP का करीब 6.7% हो गया है, जो 15 साल का उच्चतम स्तर है। भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए करीब 20% नॉमिनल ग्रोथ चाहिए। फिलहाल देश की सिर्फ 8% आबादी इनकम टैक्स देती है, जबकि फिलीपींस में यह आंकड़ा 23.2% और इंडोनेशिया में 26.1% है।
यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।




