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लावारिस जमा में SBI टॉप पर, RBI के पास ₹86,917 करोड़ फंसे

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में बताया, 30 जून तक बैंकों की लावारिस जमा राशि RBI के डीईए फंड में पहुंची, जिसमें SBI का हिस्सा सबसे बड़ा है।

लावारिस जमा में SBI टॉप पर, RBI के पास ₹86,917 करोड़ फंसे
फोटो: Ganesh Dhamodkar · CC BY-SA 4.0

देश के बैंकों में पड़ी लावारिस जमा राशि का आंकड़ा 86 हजार 917 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि 30 जून तक यह पूरी रकम भारतीय रिज़र्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) में जमा थी।

इस लावारिस राशि में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का है, जिसने 20 हजार 40 करोड़ रुपये डीईए फंड में ट्रांसफर किए हैं। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक के 7 हजार 585 करोड़, केनरा बैंक के 6 हजार 830 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा के 5 हजार 848 करोड़ और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 5 हजार 549 करोड़ रुपये इस फंड में शामिल हैं।

निजी बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे आगे है, जिसकी 2 हजार 278 करोड़ रुपये की लावारिस जमा राशि डीईए फंड में है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक के 1912 करोड़ और एक्सिस बैंक के 1734 करोड़ रुपये हैं।

नियम के अनुसार, अगर किसी बचत या चालू खाते में लगातार 10 साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो उसे लावारिस माना जाता है। इसी तरह किसी सावधि जमा (टर्म डिपॉजिट) की मैच्योरिटी के बाद 10 साल तक दावा न किए जाने पर वह भी इसी श्रेणी में आ जाती है। इसके बाद बैंक यह रकम आरबीआई के डीईए फंड में ट्रांसफर कर देते हैं।

हालांकि यह पैसा हमेशा के लिए नहीं खोता। अगर बाद में सही जमाकर्ता या उसका कानूनी वारिस दावा करता है, तो बैंक उसे रकम लौटाता है। 30 जून तक ऐसे दावों के भुगतान के लिए डीईए फंड से बैंकों को 17 हजार 415 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं।

सरकार और आरबीआई इस लावारिस राशि को कम करने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्राहकों, नॉमिनी और कानूनी वारिसों की तलाश के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाएं और अपनी वेबसाइट पर लावारिस जमा की जानकारी हर महीने अपडेट करें। इसके साथ ही वित्तीय जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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