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एक क्लिक पर जुड़ी दुनिया, फिर भी बढ़ रहा अकेलापन

विशेषज्ञों के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों का कारोबारी मॉडल यूजर्स के स्क्रीन टाइम पर निर्भर है, और अकेलापन सेहत के लिए रोज 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक माना जाता है।

एक क्लिक पर जुड़ी दुनिया, फिर भी बढ़ रहा अकेलापन
फोटो: Doctorxgc · CC BY-SA 4.0

इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में लोग देश-दुनिया के किसी भी कोने से एक क्लिक पर एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं, लेकिन इसके उलट बड़ी संख्या में लोग पहले से ज्यादा अकेलापन महसूस कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अकेलेपन को एक वैश्विक महामारी मान रहे हैं।

स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, अकेलापन सेहत के लिए प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक माना जाता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक कंपनियां लोगों के इसी अकेलेपन से मुनाफा कमा रही हैं।

'इंसानी दिमाग खोखला कर रही कंपनियां'

ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने लेखक पॉल डेली इस कड़वे सच की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि तकनीक कंपनियां इंसानी दिमाग को खोखला करके लगातार अमीर होती जा रही हैं। डेली के मुताबिक, लोग यह जानते हुए भी कि सोशल मीडिया उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, उससे दूरी नहीं बना पा रहे हैं।

स्क्रीन टाइम पर टिका कारोबार

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों का बिजनेस मॉडल यूजर्स के स्क्रीन टाइम पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा समय लोग प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं, उतना ही ज्यादा विज्ञापन दिखते हैं और कंपनियों की कमाई बढ़ती है।

यही वजह है कि कंपनियां ऐसे फीचर और एल्गोरिदम तैयार करती हैं, जो लोगों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखें। रिपोर्ट के मुताबिक इसी सिलसिले में युवाओं में डिप्रेशन और एंग्जाइटी का खतरा बढ़ने तथा 'डोपामाइन के खेल' पर भी चर्चा हो रही है, जिसके जरिये यूजर्स को बार-बार प्लेटफॉर्म पर लौटने के लिए प्रेरित किया जाता है।

विशेषज्ञ लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब नुकसान की जानकारी होने के बाद भी उपयोगकर्ता खुद को रोक नहीं पा रहे, तो जिम्मेदारी किसकी है — यूजर की या उन प्लेटफॉर्म की, जिनका पूरा ढांचा ध्यान खींचे रखने पर बना है।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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