रेलवे पारादीप बंदरगाह कनेक्टिविटी पर खर्च करेगी 3,300 करोड़ रुपये
98 किलोमीटर नई रेल लाइनों से पारादीप बंदरगाह की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, 2030-31 तक लक्ष्य पूरा करने की योजना

भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई से कमाई बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स क्षमता मजबूत करने के लिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह की रेल कनेक्टिविटी सुधारने का फैसला किया है। इसके तहत दो अलग-अलग मार्गों पर कुल 98 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी, जिन पर करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
हरिदासपुर–पारादीप मार्ग (53 किलोमीटर) पर मौजूदा सिंगल लाइन को दोहरा किया जाएगा। इस करीब 1,100 करोड़ रुपये की परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को रेल मंत्रालय पहले ही मंजूरी दे चुका है। दूसरी ओर, कटक-पारादीप मार्ग (45 किलोमीटर) पहले से दोहरी लाइन है, लेकिन दबाव कम करने के लिए यहां दो अतिरिक्त लाइनें बिछाई जाएंगी। इस लगभग 2,210 करोड़ रुपये की परियोजना की डीपीआर अंतिम चरण में है और जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, देरी से बचने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और कम से कम 90 फीसदी जमीन अधिग्रहण के बाद ही टेंडर जारी होंगे। अगले साल टेंडर जारी होने और 2030-31 तक दोनों मार्गों पर काम पूरा होने की संभावना है।
यह कदम रेलवे के 'मिशन 3000' का हिस्सा है, जिसके तहत 2030-31 तक सालाना माल ढुलाई को 3,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेलवे ने माल ढुलाई से 1.89 लाख करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य रखा है, जो पिछले वित्त वर्ष के 1.78 लाख करोड़ रुपये से 5.8 फीसदी अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने 1.67 अरब टन माल ढुलाई का रिकॉर्ड बनाया था।
पारादीप, देश का दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक बंदरगाह है, जिसने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 156.45 मिलियन टन माल का प्रबंधन किया। देश में कुल 226 मान्यता प्राप्त बंदरगाहों में से 69 पूरी तरह कार्यरत हैं, जिनमें 12 प्रमुख बंदरगाह सीधे रेल नेटवर्क से जुड़े हैं।
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