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भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा निर्माण पर बढ़ेगा सहयोग, ताशकंद में बैठक

रक्षा सहयोग पर छठी जॉइंट वर्किंग ग्रुप बैठक में संयुक्त अभ्यास और रक्षा उद्योग स्थापना पर चर्चा; ईस्टर्न रेलवे की माल ढुलाई में भी बढ़ोतरी दर्ज।

भारत-उज्बेकिस्तान रक्षा निर्माण पर बढ़ेगा सहयोग, ताशकंद में बैठक
फोटो: Adityamadhav83 · CC BY-SA 4.0

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग पर छठी जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक बुधवार को ताशकंद में हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव दिनेश कुमार और उज्बेकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग केंद्रीय विभाग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल सुखरोबजोन सोदिकजोनोविच सिरोजोव ने की।

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर बताया कि बैठक में संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा शिक्षा तथा रक्षा उद्योगों की स्थापना जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। संयुक्त प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों में विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे।

रक्षा निर्यातक के रूप में भारत की मजबूत होती स्थिति के साथ रक्षा निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बात हुई। नई दिल्ली रक्षा क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना पर विशेष जोर दे रही है, इसी क्रम में तकनीक के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के रखरखाव से जुड़े विषय भी उठे। यह बैठक विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के बीच नई दिल्ली में हुई चर्चाओं के क्रम में आयोजित की गई। दोनों देशों का रक्षा सहयोग 2019 में बने जॉइंट वर्किंग ग्रुप के जरिये आगे बढ़ाया जाता है।

ईस्टर्न रेलवे की माल ढुलाई बढ़ी

ईस्टर्न रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में माल ढुलाई में बढ़ोतरी दर्ज की, जिसमें आयातित कोयले की आवाजाही की बड़ी भूमिका रही। यह कोयला मुख्य रूप से एनटीपीसी के ताप बिजली संयंत्रों तक पहुंचाया गया। 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 के बीच 2.314 करोड़ टन कोयले की ढुलाई हुई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 7.29 प्रतिशत अधिक है। कोयला ढुलाई से राजस्व 13.22 प्रतिशत बढ़कर 2,263.20 करोड़ रुपये रहा। कुल माल ढुलाई 3.3391 करोड़ टन (2.43 प्रतिशत वृद्धि) और कुल माल राजस्व 3,192.97 करोड़ रुपये (4.89 प्रतिशत वृद्धि) रहा। एक अधिकारी के मुताबिक अतिरिक्त राजस्व से ट्रैक आधुनिकीकरण और स्टेशन सुविधाओं पर खर्च किया जा सकेगा।

खाने के पैकेट पर क्यूआर कोड

रेलवे ने ट्रेन में मिलने वाले खाने के हर पैकेट पर क्यूआर कोड लगाने का फैसला किया है। स्कैन करते ही यात्री जान सकेंगे कि खाना कब पैक हुआ, किसने तैयार किया और एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर क्या है। रेल मंत्रालय ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि रेलवे हर साल करीब 58 करोड़ भोजन पैकेट देता है और गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों का औसत 0.0008 प्रतिशत है। पिछले तीन वर्षों में नियमों का पालन न करने वाले वेंडरों पर 5.13 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया, 54 को कारण बताओ नोटिस दिए गए, छह ठेके रद्द हुए और कई लाइसेंसधारक ब्लैकलिस्ट किए गए।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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