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ब्याज दरों के लिए एक जैसा नियम बनाने की तैयारी में आरबीआई

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंकों, एनबीएफसी और सभी विनियमित संस्थानों में कर्ज की ब्याज दर तय करने के तरीकों में एकरूपता लाई जाएगी, मसौदा जल्द जारी होगा।

ब्याज दरों के लिए एक जैसा नियम बनाने की तैयारी में आरबीआई
फोटो: Vyacheslav Argenberg · CC BY 4.0

कर्ज की ब्याज दरें तय करने के तरीके में अब बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों के लिए एक जैसा नियम लागू करने का प्रस्ताव भारतीय रिज़र्व बैंक ने रखा है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा कि इस कदम का उद्देश्य कर्जदारों के लिए कर्ज की लागत को अधिक पारदर्शी और सुसंगत बनाना है। इसका मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जल्द जारी किया जाएगा।

मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग संस्थान ब्याज दर तय करने के लिए अलग तरीके अपनाते हैं। बैंक एमसीएलआर और ईबीएलआर जैसे मानकों पर काम करते हैं, जबकि एनबीएफसी और अन्य संस्थानों के अपने नियम हैं। इससे ग्राहकों के लिए विभिन्न संस्थानों की दरों की सटीक तुलना करना मुश्किल होता है।

आरबीआई के मुताबिक नियम और गणना के दिन समान होने से कर्ज प्रक्रिया में छिपी शर्तें कम होंगी, उपभोक्ता दरों की तुलना कर सकेंगे और री-सेट तिथियों के मानकीकरण से फ्लोटिंग रेट कर्ज में रेपो दर कटौती का लाभ समय पर पहुंचेगा।

शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस फिर खुलेंगे

करीब 22 साल बाद शहरी इलाकों में नए सहकारी बैंक खुल सकेंगे। आरबीआई ने ऑन-टैप आधार पर नए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है और 2004 से लगी रोक हटाई जा रही है। गवर्नर ने कहा कि यह फैसला हितधारकों के सुझावों की समीक्षा के बाद लिया गया, क्योंकि दो दशकों में इन बैंकों का नियमन और प्रदर्शन बेहतर हुआ है। मसौदा दिशानिर्देश जल्द आएंगे।

आवेदन के लिए अच्छी पूंजी वाली सहकारी ऋण समितियां ही पात्र होंगी। आवेदकों के पास बीते वित्त वर्ष की 31 मार्च तक 300 करोड़ रुपये की पूंजी होनी चाहिए और लाइसेंस मिलते समय शुद्ध एनपीए 3 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

यूपीआई और अनुमान

मल्होत्रा ने कहा कि यूपीआई लेनदेन में मर्चेंट शुल्क का बोझ आम उपयोगकर्ताओं पर नहीं डाला जाएगा, हालांकि डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत किसी न किसी को चुकानी होगी; सरकार इस पर विचार कर रही है।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर का अनुमान 6.6 से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है और खुदरा महंगाई का अनुमान 5.1 से घटाकर 5 फीसदी किया है।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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