OFS के बाद LIC के शेयर गिरे, ₹31,552 करोड़ जुटे
भारतीय जीवन बीमा निगम का ऑफर फॉर सेल दो दिन में बंद, सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया और सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 फीसदी हो गई।

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया के साथ दो दिन में बंद हो गया। सरकार ने ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया। इसके साथ ही सेबी की तय समय सीमा से पहले एलआईसी में सार्वजनिक स्वामित्व बढ़कर 10 फीसदी हो गया है।
ओएफएस में कुल 31,552 करोड़ रुपये की राशि के लिए 82 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित किए गए। 382 रुपये के फ्लोर प्राइस पर 82.22 करोड़ शेयरों की बिक्री से सरकार के विनिवेश खजाने में 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम आई है।
ओएफएस क्या है
ओएफएस किसी सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा शेयरधारक को स्टॉक एक्सचेंज के जरिये शेयर बेचने की अनुमति देता है। एलआईसी के मामले में भारत सरकार अपनी मौजूदा हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच रही है। एलआईसी न तो नए शेयर जारी कर रही है और न ही उसे इस सौदे से कोई पैसा मिलेगा — पूरी राशि सरकार के पास जाएगी। कंपनी के कुल शेयरों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा, सिर्फ सरकार की हिस्सेदारी घटेगी और आम निवेशकों की बढ़ेगी।
सरकार ने हिस्सेदारी क्यों बेची
सरकार के पास अब तक एलआईसी में 96.5 फीसदी हिस्सेदारी थी, जबकि सार्वजनिक निवेशकों के पास केवल 3.5 फीसदी। सेबी ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 फीसदी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग तक पहुंचने का समय दिया था। यह बिक्री कंपनी को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग के नियम का समय से पहले पालन करने में मदद करेगी।
शेयर क्यों गिरे
सरकार ने फ्लोर प्राइस 382 रुपये तय किया, जो एलान से पहले के बंद भाव 428.50 रुपये से 10.9 फीसदी कम है। जब निवेशकों को पता चला कि ओएफएस में शेयर सस्ता मिल रहा है, तो खुले बाजार में महंगी खरीदारी रुक गई और भाव ओएफएस कीमत के करीब आ गया।
दूसरी वजह आपूर्ति है। इस बिक्री से बाजार में उपलब्ध एलआईसी के शेयरों की संख्या लगभग तीन गुनी हो जाएगी। किसी भी शेयर की आपूर्ति अचानक बढ़ने पर कीमत कुछ समय के लिए दबाव में आ जाती है।
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