UP-RERA ने बिल्डरों और एजेंटों के लिए नियम सख्त किए
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने फंड, विज्ञापन और पजेशन से जुड़े नए नियम लागू किए, घर खरीदारों को मिलेगी बड़ी सुरक्षा।

उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथारिटी (UP-RERA) ने बिल्डरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत बिल्डरों को प्रोफेशनल्स के सर्टिफिकेट के साथ Quarterly Progress Report (QPR) जमा करनी होगी, जिसके लिए 15 हजार रुपये की फीस देनी होगी।
प्रोजेक्ट से जुड़ा लोन का पैसा अब अलग बैंक अकाउंट में रखना अनिवार्य होगा और हर वित्तीय वर्ष में अकाउंट्स का ऑडिट कराना होगा, जिसकी फीस 25 हजार रुपये तक हो सकती है। खरीदारों से प्रोजेक्ट का पैसा नकद नहीं लिया जा सकेगा।
रियल एस्टेट एजेंटों को रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के लिए ट्रेनिंग सर्टिफिकेट देना होगा और हर तीन महीने में अपने ट्रांजैक्शन की जानकारी जमा करनी होगी, जिसकी फीस 10 हजार रुपये तक तय की गई है। समय पर रिपोर्ट जमा न करने पर लेट फीस लगेगी।
बिल्डरों को अब अपने प्रोजेक्ट से जुड़े ग्राहक संबंध प्रबंधक, टोल-फ्री नंबर और इंजीनियर-आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स की जानकारी भी देनी होगी। विज्ञापन में वेबसाइट, UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, कलेक्शन अकाउंट, QR कोड, एजेंट का रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख देना अनिवार्य किया गया है।
अगर किसी खरीदार ने बिना रजिस्टर हुए प्रोजेक्ट में प्रॉपर्टी खरीदी है, तो वह भी अब UP-RERA में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है। खरीदारों से लिए गए मेंटेनेंस के पैसे (IFMS) को बिल्डर को अलग बैंक अकाउंट में रखना होगा, जो बाद में रेजिडेंट्स एसोसिएशन को सौंपा जाएगा और इसका उपयोग केवल मेंटेनेंस के लिए ही किया जा सकेगा।
अलॉटी के निधन पर प्रॉपर्टी परिवार के सदस्य को ट्रांसफर करने पर 1 हजार रुपये फीस लगेगी, जबकि परिवार से बाहर ट्रांसफर पर यह फीस 25 हजार रुपये तक हो सकती है। बिल्डरों को अब हर प्रोजेक्ट के लिए ट्रांजैक्शन अकाउंट, कलेक्शन अकाउंट और एक अलग अकाउंट रखना होगा, और कब्जा देते समय UP-RERA के तय फॉर्मेट में ऑफर ऑफ पजेशन जारी करना होगा।
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