'ममता पर हमला लोकतंत्र पर आघात': शिवसेना यूबीटी
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले को गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार बताया और केंद्र सरकार के रवैये को विरोधाभासी कहा।

शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल एक राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं, बल्कि 'हमारे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार' है।
पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में लिखा, 'पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने उनके वाहन को घेर लिया, जिसका साफ उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना लग रहा था। उनका बच जाना सिर्फ संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है — पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी सीमाओं को पार कर चुकी है।'
'सत्ताधारी दल का रवैया विरोधाभासी'
संपादकीय के मुताबिक राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद और विधायक शामिल हैं। पार्टी ने लिखा कि सत्ताधारी दल के रवैये में विरोधाभास साफ दिखाई देता है — जहां केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं।
'सामना' ने यह सवाल भी उठाया कि जब केंद्र सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था के पतन का हवाला देकर अपने हस्तक्षेपों को उचित ठहराया था, तो क्या 'अनियंत्रित शत्रुता और राज्य द्वारा स्वीकृत मनमानी' का मौजूदा माहौल ही उनके लिए कानून-व्यवस्था की परिभाषा है।
संपादकीय में केंद्र सरकार पर निशाना साधने के साथ-साथ राज्य में विपक्षी दलों के रवैये की भी आलोचना की गई है। पार्टी ने बंगाल के मौजूदा हालात को चिंताजनक बताया है।
(यह रिपोर्ट शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित है। इसमें दर्ज दावे पार्टी के हैं।)
यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।





