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अंबिकापुर निगम सभा में हंगामा, विपक्ष का बहिष्कार

महापौर मंजूषा भगत के वायरल ऑडियो पर चर्चा से सत्तापक्ष के इनकार के बाद विपक्षी पार्षदों ने सामान्य सभा का बहिष्कार कर दिया।

अंबिकापुर निगम सभा में हंगामा, विपक्ष का बहिष्कार
फोटो: Indifacts · CC BY-SA 4.0

अंबिकापुर नगर निगम की सामान्य सभा मंगलवार को महापौर के वायरल ऑडियो के मुद्दे पर हंगामे की भेंट चढ़ गई। सत्तापक्ष के चर्चा से इनकार के बाद विपक्षी पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और शेष कार्यवाही बिना विपक्ष चली।

प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने महापौर के वायरल ऑडियो पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। इस पर सत्तापक्ष के पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। एमआईसी सदस्य मनीष सिंह ने कहा कि सामान्य सभा में उन्हीं सवालों पर चर्चा होनी चाहिए, जो पहले से प्रश्न के रूप में लिए गए हैं। बहस लंबी चलने से प्रश्नकाल नहीं चल सका और कुछ देर कार्यवाही रोकनी पड़ी।

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष ने शहर की सड़क, पेयजल और बिजली की समस्याओं पर सत्तापक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि पार्षदों से जानकारी लेकर गड्ढों की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार कर आयुक्त के सामने रखा गया, लेकिन उसे वापस कर दिया गया। पेयजल पर उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 40 प्रतिशत आपूर्ति कम रही, जबकि लोगों से पूरा पैसा लिया गया, जो सीधे तौर पर शोषण है। इसी दौरान पहले सभापति, फिर महापौर मंजूषा भगत और उसके बाद एमआईसी सदस्य बैठक छोड़कर बाहर चले गए।

शफी अहमद के मुताबिक कलाकेंद्र मैदान के आवंटन में रिश्वतखोरी से जुड़ा महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष का ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें कार्रवाई की मांग को लेकर महापौर ने अजाक थाने में आवेदन दिया था, लेकिन दो माह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष विपक्ष की आवाज दबाना चाहता है।

महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि सभा में शहर के विकास पर चर्चा होनी थी और विपक्ष बेबुनियाद व्यक्तिगत आरोप लगा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है और जांच चल रही है, तथा निगम 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य करा रहा है।

सभा में पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि फायर स्टेशन के पास निगम की तीन दुकानें राजू अग्रवाल और उनके दो बेटों ने 24-24 लाख रुपये में खरीदी थीं, जिन्हें निगम के ईई अशोक निरंजन, उनकी पत्नी और बेटे को 70-70 लाख रुपये में बेच दिया गया। हंगामे के बाद दुकानों के नामांतरण पर रोक लगा दी गई।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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