परिसीमन विधेयक: सरकार ने आंकड़े जुटाए, गतिरोध तोड़ने की कोशिश
संविधान संशोधन विधेयक के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन की दिशा में सरकार को डीएमके और पवार गुट से उम्मीद, लेकिन संसद में हंगामा जारी।

परिसीमन को लागू करने की दिशा में जरूरी राजनीतिक समर्थन जुटाने के बाद सरकार ने अब अपना पूरा ध्यान संसद में जारी गतिरोध खत्म करने पर लगा दिया है।
परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव सदन में संविधान संशोधन विधेयक के रूप में लाया जाना है। ऐसे विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। इसी वजह से सरकार नहीं चाहती कि विधेयक हंगामे और विपक्ष के बहिष्कार के बीच पेश हो।
डीएमके की शर्त
रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके 50 फीसदी आनुपातिक सीट बढ़ोतरी की शर्त पर विधेयक के लिए तैयार दिख रही है। यानी दक्षिणी राज्यों की चिंता को देखते हुए सीटों में आनुपातिक इजाफे की मांग को आधार बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर, शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के आठ सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को भी सरकार अपनी सफलता मान रही है।
गतिरोध अभी कायम
इन कोशिशों के बावजूद संसद में गतिरोध खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने विपक्षी दलों से बातचीत तेज कर दी है। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद विपक्ष को यह प्रस्ताव दिया गया कि नीट पेपर लीक आंदोलन के मामले में गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देंगे। इसे भी गतिरोध खत्म करने की उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार विपक्ष को साधकर संविधान संशोधन विधेयक के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन जुटा पाएगी या नहीं। परिसीमन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में है, क्योंकि इससे राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का संतुलन प्रभावित होगा। सरकार की कोशिश है कि विधेयक व्यापक सहमति के साथ सदन में आए, ताकि उसे संख्या के मोर्चे पर किसी अड़चन का सामना न करना पड़े।
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