मानसून सत्र: 4 दिन बाकी, तीन बड़े विधेयक अटके
महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए संशोधन विधेयक सोमवार 10 अगस्त को लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं थे, जबकि सत्र खत्म होने में सिर्फ चार दिन बचे हैं।

संसद के मानसून सत्र के समाप्त होने में चार दिन बचे हैं और सदन में जारी गतिरोध के बीच तीन बड़े विधेयकों — महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक — का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से कोई भी विधेयक सोमवार 10 अगस्त को लोकसभा की कामकाज सूची में शामिल नहीं था।
सरकार की कोशिशों के बाद कुछ विपक्षी दलों ने महिला कोटा और परिसीमन विधेयक पर रुख नरम करने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस और उसके अधिकतर सहयोगी दल इन कानूनों तथा एफसीआरए संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
संविधान संशोधन विधेयक में 2029 से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और सदन की सीटें बढ़ाने के लिए लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन का प्रस्ताव है। अप्रैल में 131वें संशोधन विधेयक के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण विधेयक गिर गया था। एनडीए गठबंधन के पास इस समय 299 सांसद हैं, जो 360 के आंकड़े से काफी पीछे है।
एफसीआरए पर टकराव
एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश हुआ था और इस पर चर्चा तथा पारित होना बाकी है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि वह दो-तीन दिन में यह विधेयक ला सकती है, तो "उन्हें अपनी यह इच्छा अपने तक ही रखनी चाहिए"। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और एनजीओ को निशाना बनाता है और विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गतिरोध खत्म करने के लिए राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की और फोन पर भी बात की। सूत्रों के अनुसार समर्थन मांगे जाने पर विपक्ष के नेता ने सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दिया।
शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को दोनों विधेयकों को समर्थन दिया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय द्वारा बुलाई बैठक में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ और लोकसभा सीटें 543 पर ही बनाए रखने की मांग की गई; डीएमके और अन्नाद्रमुक ने इस बैठक का विरोध किया। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दोनों सदनों में उपस्थित रहने को कहा है।
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