जस्टिस वर्मा कैश कांड: संसदीय समिति ने तीनों आरोप सही पाए
संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा नकदी का स्रोत नहीं बता सके और सबूतों से छेड़छाड़ हुई।

संसद की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया है। यह मामला 2025 में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम से नकदी मिलने से जुड़ा है। पैनल की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक स्टोररूम में ₹500 के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने बताया कि नोटों के बंडल 7-8 फीट तक फैले हुए थे। जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत, मालिकाना हक या वहां मौजूद होने की संतोषजनक वजह नहीं बता सके। हालांकि नोटों को न तो जब्त किया गया, न गिना गया और न ही उनके नमूने सुरक्षित किए गए, इसलिए कुल नकदी की सही मात्रा तय नहीं हो सकी।
समिति ने पाया कि आग बुझने के बाद स्टोररूम को तुरंत सील नहीं किया गया और सुरक्षा अधिकारी ने जस्टिस वर्मा के स्टाफ को रात करीब 3 बजे वहां सफाई करते देखा था। सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरा साफ कर दिया गया, जिससे अहम सबूतों से छेड़छाड़ हुई।
तीसरे आरोप में समिति ने जस्टिस वर्मा के जवाबों को टालमटोल भरा और भ्रामक बताया। शुरुआत में उन्होंने कैश के बारे में जानकारी होने से इनकार किया था, बाद में नकदी नकली होने या साजिश के तहत रखे जाने की बात कही, लेकिन इसके समर्थन में कोई एफआईआर, शिकायत या ठोस सबूत पेश नहीं हुआ। जस्टिस वर्मा ने खुद गवाही नहीं दी और परिवार या स्टाफ को गवाह के रूप में पेश नहीं किया।
जस्टिस वर्मा इस साल 9 अप्रैल को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक जजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर कोई संवैधानिक प्रतिबंध नहीं है और अब समिति की रिपोर्ट के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। भारत में महाभियोग के तहत अब तक किसी जज को नहीं हटाया गया है।
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