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FCRA बिल JPC को भेजा गया, कांग्रेस-सपा में एक राय नहीं

लोकसभा में FCRA संशोधन बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया, पर कांग्रेस के भीतर बिल वापस लेने और JPC भेजने को लेकर दो मत सामने आए।

FCRA बिल JPC को भेजा गया, कांग्रेस-सपा में एक राय नहीं
फोटो: Rajeshodayanchal · CC BY-SA 4.0

लोकसभा में बुधवार को हंगामे के बीच FCRA संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। इससे पहले गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बिल पेश किया, तो कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने कहा कि JPC की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार को बिल ही वापस ले लेना चाहिए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से पूछा कि बिल में अल्पसंख्यक विरोधी कौन-सा प्रावधान है। सरकार की ओर से कहा गया कि कांग्रेस ने पहले JPC भेजने की मांग की थी, अब भेजे जाने पर बिल वापस लेने की बात कह रही है। दरअसल 25 मार्च 2026 को बिल पेश होने पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे संवैधानिक रूप से समस्याग्रस्त बताते हुए JPC या सेलेक्ट कमेटी भेजने की मांग की थी। इसी वजह से लोकसभा में केसी वेणुगोपाल के बिल वापस लेने के रुख और राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे के JPC भेजने के समर्थन ने कांग्रेस को दो धड़ों में बंटा दिखाया।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि पार्टी का पक्ष है कि बिल वापस लिया जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सरकार संकट के समय ध्यान भटकाने के लिए संशोधन लाती है, हालांकि सरकार ने चुनौती दी कि विपक्ष बिल में किसी धर्म के खिलाफ एक शब्द भी दिखाए।

मौजूदा FCRA कानून विदेशी चंदे को नियंत्रित करता है ताकि उसका इस्तेमाल देश की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ न हो। नए संशोधन में रजिस्ट्रेशन रद्द होने पर संस्था की संपत्ति अस्थायी रूप से सरकार के अधीन जाने, राज्य एजेंसियों को जांच से पहले केंद्र की अनुमति लेने और अधिकतम सजा 5 साल से घटाकर 1 साल करने जैसे प्रावधान हैं। विपक्ष को आशंका है कि इसका इस्तेमाल मुस्लिम और ईसाई एनजीओ के खिलाफ किया जा सकता है।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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