बिलासपुर: दूध विक्रेताओं की जांच, 19 सैंपल लैब भेजे
एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग ने घरों और डेयरी फर्मों तक दूध पहुंचाने वाले हॉकरों की जांच की और 19 नमूने रायपुर की लैब भेजे।

छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध के बाद बिलासपुर में खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग ने दूध विक्रेताओं पर निगरानी बढ़ा दी है। मंगलवार को विभाग की टीम ने शहर में घरों और डेयरी फर्मों तक दूध पहुंचाने वाले हॉकरों और विक्रेताओं की जांच की। अलग-अलग विक्रेताओं से दूध के 19 नमूने लिए गए, जिन्हें जांच के लिए रायपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।
राज्य शासन के प्रतिबंध के बाद जिले में विभाग लगातार जांच और छापेमारी कर रहा है। टीम रेस्टोरेंट और ढाबों के साथ दूध तथा दूध से बने उत्पाद तैयार करने वाली डेयरियों की भी जांच कर रही है। संस्थानों से लिए गए नमूने रायपुर लैब भेजे जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक जांच में किसी तरह की खामी मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हॉकरों से पूछी सप्लाई की जानकारी
डीओ आरआर देवांगन के अनुसार टीम ने विक्रेताओं से दूध की खरीद और सप्लाई से जुड़ी जानकारी ली। उनसे पूछा गया कि दूध कहां से लिया जा रहा है और किन-किन जगहों पर उसकी सप्लाई की जा रही है। जांच के दौरान विक्रेताओं को खाद्य-औषधि प्रशासन विभाग में जरूरी पंजीयन कराने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों के अनुसार खाद्य कारोबार से जुड़े विक्रेताओं का पंजीयन खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई
लैब में दूध की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही मिलावट या गुणवत्ता में कमी का पता चलेगा। किसी सैंपल में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का कहना है कि दूध की गुणवत्ता खराब होने का असर उससे बनने वाले पनीर, खोवा और अन्य दुग्ध उत्पादों पर भी पड़ता है। इसलिए दूध की जांच के साथ-साथ नकली और अमानक पनीर की बिक्री रोकने पर भी फोकस है। अधिकारियों के मुताबिक दूध रोजाना इस्तेमाल होने वाला खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसकी नियमित जांच जरूरी है।
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