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RBI का मसौदा: बैंक-NBFC के लिए एक समान ब्याज दर नियम

रिजर्व बैंक ने ऋणों पर ब्याज दर तय करने के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों दोनों पर लागू होने वाले सामंजस्यपूर्ण मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं।

RBI का मसौदा: बैंक-NBFC के लिए एक समान ब्याज दर नियम
फोटो: Vyacheslav Argenberg · CC BY 4.0

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बीच ब्याज दर निर्धारण नीतियों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए मसौदा नियम जारी किए।

अभी तक अग्रिमों पर ब्याज दरों से जुड़ा नियामक ढांचा केवल वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होता रहा है, जबकि एनबीएफसी मुख्य रूप से आचरण-संबंधी नियमों से शासित होती हैं। आरबीआई की अधिसूचना के अनुसार, नए मसौदे का मकसद दोनों तरह की वित्तीय संस्थाओं के लिए एक समान नियामक ढांचा तैयार करना है, ताकि ऋणों के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता आए।

प्रस्तावित दिशानिर्देश सभी विनियमित संस्थाओं पर लागू होंगे और निश्चित दर तथा परिवर्तनशील दर, दोनों तरह के ऋणों पर ब्याज दर तय करने के लिए एक व्यापक, सिद्धांतों पर आधारित ढांचा उपलब्ध कराएंगे। यह ढांचा संबंधित संस्था के परिचालन की प्रकृति, जटिलता और पैमाने के अनुरूप होगा, जिससे सभी के लिए निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

इन नियमों को "भारतीय रिजर्व बैंक (ऋणों और अग्रिमों पर ब्याज दरें) दिशानिर्देश, 2026" नाम दिया जाएगा। प्रस्ताव है कि ये अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी हों।

यह मसौदा गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा 5 अगस्त को विनियमों में सामंजस्य लाने की घोषणा के बाद जारी किया गया है। आरबीआई ने बुधवार को जारी मसौदे पर जनता से 11 सितंबर तक प्रतिक्रिया मांगी है।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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