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चंदेरी की 59 एकड़ चारागाह जमीन उद्योग को देने का आरोप

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम चंदेरी की चारागाह भूमि उद्योग विभाग को सौंपी जा रही है, जिससे मुख्यमंत्री के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी हो रही है।

चंदेरी की 59 एकड़ चारागाह जमीन उद्योग को देने का आरोप
फोटो: Hameedullah Rustami · CC BY-SA 4.0

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सिमगा तहसील के ग्राम चंदेरी में चारागाह की जमीन नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए दिए जाने के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है।

पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि नकटी के बाद अब चंदेरी की चारागाह भूमि उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। उनका दावा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी हो रही है।

अकबर के मुताबिक 23 फरवरी 2024 को दामाखेड़ा में कबीरपंथ के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि दामाखेड़ा से 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग नहीं लगाए जाएंगे। इसके बावजूद चंदेरी में करीब 23.93 हेक्टेयर यानी 59 एकड़ चारागाह भूमि नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को सौंपी जा रही है।

चार खसरों की जमीन देने का दावा

पूर्व मंत्री ने कहा कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2011 के निर्देश के अनुसार सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि किसी दूसरे प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं की जा सकती। इसके बावजूद चंदेरी के खसरा नंबर 1660, 2206, 2207 और 1743 की जमीन 6 फरवरी 2026 को उद्योग विभाग के आधिपत्य में दे दी गई।

अकबर के अनुसार ग्राम पंचायत ने 20 दिसंबर 2025 को भूमि हस्तांतरण के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 30 जुलाई 2026 की ग्राम सभा में भी चारागाह भूमि उद्योग के लिए देने का विरोध किया गया। उनका दावा है कि इसके बावजूद भुइयां पोर्टल पर जमीन उद्योग के नाम दर्ज कर दी गई।

8 से 10 पंचायतों के मवेशी निर्भर

पूर्व मंत्री ने कहा कि यह भूमि आसपास की 8 से 10 ग्राम पंचायतों के मवेशियों के लिए प्रमुख चारागाह है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और राजस्व मंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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