मास्टर प्लान दिल्ली-2047: लैंड पूलिंग नीति में बड़ा बदलाव, यमुना की भी होगी हदबंदी
अब 40 के बजाय 20 हेक्टेयर के भूखंडों पर भी लैंड पूलिंग नीति लागू होगी, जमीन का 60% हिस्सा डेवलपर और 40% डीडीए के पास रहेगा।

नई दिल्ली। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में किए गए बदलावों के बाद राजधानी में लैंड पूलिंग नीति को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। अब तक इस नीति के दायरे में आने के लिए कम से कम 40 हेक्टेयर जमीन के समूह की जरूरत होती थी, लेकिन नए बदलाव के बाद 20 हेक्टेयर जमीन का समूह भी इसके दायरे में आ सकेगा। इससे छोटे भूखंडों के मालिकों के लिए जमीन को एक साथ लाकर आवासीय और अन्य योजनाबद्ध परियोजनाएं बनाना आसान होगा। इसका सबसे ज्यादा लाभ बाहरी दिल्ली के उन इलाकों को मिल सकता है, जहां बड़े आकार के भूखंड उपलब्ध नहीं हैं।
नीति में जमीन के बंटवारे का तरीका भी बदला गया है। कुल पूल की गई जमीन में 60 फीसदी हिस्सा डेवलपर को मिलेगा, जबकि 40 फीसदी हिस्सा दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास रहेगा। डीडीए अपने हिस्से की 35 फीसदी जमीन पर सड़क, सीवेज और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करेगा, जबकि शेष पांच फीसदी जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों की गुंजाइश रहेगी। इस तरह निजी विकास के साथ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी एकीकृत तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है। 2000 वर्गमीटर क्षेत्र को टीओडी के दायरे में रखते हुए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को 500 से घटाकर 400 कर दिया गया है। किफायती आवास योजना के तहत 65 फीसदी घर 60 वर्गमीटर क्षेत्रफल के बनाए जाएंगे। सोसाइटी की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है—अब 200 के बजाय 300 घरों वाली सोसाइटी को इसमें शामिल किया जा सकेगा। इसका मकसद सार्वजनिक परिवहन के आसपास विकास को बढ़ावा देकर सड़कों पर यातायात का दबाव कम करना है।
मास्टर प्लान में किए गए इन बदलावों से विरासत इमारतों के संरक्षण और कम घनत्व वाले इलाकों को नियमित करने का रास्ता भी खुलेगा। साथ ही यमुना नदी की हदबंदी यानी सीमा निर्धारण को लेकर भी नए प्रावधान किए गए हैं।
यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।





