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कोंडागांव: आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में निकली रैली

विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार 9 अगस्त को कोंडागांव में सैकड़ों लोग आंगा देव के साथ रैली में शामिल हुए, 'एक तीर, एक कमान, सभी आदिवासी एक समान' का नारा गूंजा।

कोंडागांव: आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में निकली रैली
फोटो: Anon-ymousTrecen · CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार, 9 अगस्त को आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। सैकड़ों लोग पारंपरिक वेशभूषा में आंगा देव के साथ निकली रैली में शामिल हुए।

रैली में शामिल महिलाएं और पुरुष पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सुसज्जित थे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकधुनों के बीच निकली यात्रा ने शहर के माहौल को जनजातीय रंग में रंग दिया। यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा भी शामिल हुए, जिन्होंने अपने रीति-रिवाजों का प्रदर्शन किया। इस दौरान 'एक तीर, एक कमान, सभी आदिवासी एक समान' का संदेश गूंजा।

आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोक संस्कृति और जनजातीय पहचान का प्रदर्शन किया गया। पूरे कार्यक्रम में समाज की एकता और अपनी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

वक्ताओं ने जड़ों से जुड़े रहने पर दिया जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं को सदियों पुरानी अनमोल धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि समाज की सादगी, संघर्षशीलता, आत्मसम्मान और प्रकृति के प्रति समर्पण प्रेरणादायी है।

वक्ताओं ने आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों और पहचान से जुड़े रहने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जान सकें।

आयोजन में कहा गया कि यह दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के अधिकारों, सम्मान और पहचान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का दिन भी है। चूंकि आदिवासी समाज का जीवन जल, जंगल और जमीन से गहराई से जुड़ा है, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ जनजातीय अस्मिता और अधिकारों का सम्मान किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

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