तरेम-पामेड सड़क दो महीने में उखड़ने लगी, ग्रामीणों ने लगाया घटिया निर्माण का आरोप
छत्तीसगढ़ को तेलंगाना से जोड़ने वाले इस मार्ग की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने की है।

सुकमा-बीजापुर सीमा पर तरेम-पामेड इलाके में बनी सड़क निर्माण के महज दो महीने बाद ही जगह-जगह से उखड़ने लगी है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि घटिया निर्माण के कारण सड़क की डामर परत कई जगह से खराब हो गई है।
जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर तरेम-पामेड मार्ग पर कई जगह डामर परत उखड़ी हुई नजर आई। कुछ हिस्सों में मरम्मत का काम भी चलता मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की उखड़ी डामर को हटाकर किनारे रखा जा रहा है और जल्दबाजी में मरम्मत कर निर्माण की खामियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप: गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जिस सड़क से उन्हें लंबे समय तक बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, वह निर्माण के कुछ ही समय बाद खराब होने लगी है। इन आरोपों पर निर्माण एजेंसी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
नक्सल प्रभावित इलाके के लिए जीवनरेखा
तरेम-पामेड क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। विकास कार्यों से पिछड़े इस इलाके में सड़क निर्माण को ग्रामीणों के लिए बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से आवागमन आसान होने के साथ स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
यह मार्ग छत्तीसगढ़ को तेलंगाना से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस सड़क का इस्तेमाल ग्रामीणों के साथ-साथ सुरक्षा बल भी करते हैं।
विधायक ने जांच की मांग की
बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि निर्माण में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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