हिरासत में मौत: SC ने CBI को सौंपी जांच, ₹25 लाख मुआवजा
बिलासपुर के श्रवण सूर्यवंशी की जेल में मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिरासत में हुई श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। बुधवार, 12 अगस्त को हुई सुनवाई में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर पुलिस के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि मामले की जांच का ज़िम्मा पुलिस के पास बनाए रखना न्यायसंगत नहीं लगता।
अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि वह मृतक के परिवार को फिलहाल 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दे। जजों ने कहा कि मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। अंतिम मुआवजा राशि पर फैसला बाद में किया जाएगा।
क्या है मामला
18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले के सीपत थाने की पुलिस ने 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उनकी किराने की दुकान में बिक्री के लिए 1,200 रुपये की कच्ची महुआ शराब रखी थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। 21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया और 22 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मौत के बाद सीजेएम, बिलासपुर के निर्देश पर हुई जांच में मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट बताया गया। इसके बाद परिवार ने पुलिसकर्मियों और जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। अक्टूबर 2024 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय में याचिका
उच्च न्यायालय के आदेश से असंतुष्ट होकर श्रवण की पत्नी लहरा बाई और उनकी 8 तथा 10 वर्ष की दो नाबालिग बेटियों ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। 28 जुलाई को अदालत ने एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए और राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव तथा डीजीपी को 4 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिये पेश होने का आदेश दिया। अदालत की सख्ती के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई।
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