CWG 2026: यामिनी मौर्य बोलीं- एक गलती ने गोल्ड छीन लिया
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो के महिला 57 किग्रा वर्ग में रजत जीतने वाली यामिनी मौर्य ने कहा कि फाइनल में जरूरत से ज्यादा आक्रामकता उन्हें भारी पड़ी।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में रजत पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने कहा है कि उन्हें स्वर्ण पदक जीतने का पूरा भरोसा था, लेकिन फाइनल में हुई एक गलती ने उनका सपना तोड़ दिया।
महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में यामिनी का मुकाबला इंग्लैंड की एसेल्या टोपराक से हुआ। करीब सात मिनट चले मुकाबले में गोल्डन स्कोर के दौरान तीसरा शिडो मिलने के बाद उन्हें इप्पोन से हार का सामना करना पड़ा। टोपराक ने स्वर्ण जीता, जबकि यामिनी को रजत से संतोष करना पड़ा।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में यामिनी ने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास था कि मैं गोल्ड मेडल जीतूंगी। मैंने अपने फोन के वॉलपेपर पर भी गोल्ड मेडल की तस्वीर लगा रखी थी, क्योंकि मुझे यकीन था कि वह मेरा ही होगा। लेकिन एक गलती ने सब कुछ बदल दिया।'
उन्होंने माना कि जरूरत से ज्यादा आक्रामक होना उनके लिए भारी पड़ गया। उन्होंने कहा, 'मैंने फाइनल को चार-पांच बार अपने दिमाग में दोहराया। मुझे महसूस हुआ कि आखिरी शिडो ने सब कुछ बदल दिया। अगर मैं शांत रहती और ज्यादा आक्रामक नहीं होती तो शायद मुकाबला मेरे पक्ष में जाता। मुझे प्रतिद्वंद्वी की गलती का इंतजार करना चाहिए था। आखिर में गलती मैंने कर दी।'
26 मार्च 1998 को मध्य प्रदेश के सागर में जन्मीं यामिनी विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल, एशियाई चैंपियनशिप और आईजेएफ वर्ल्ड टूर में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह कई बार सीनियर नेशनल चैंपियन भी रही हैं।
जूडो में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
ग्लासगो में भारत ने जूडो की 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य सहित चार पदक जीते। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को तीन पदक मिले थे और एक भी स्वर्ण नहीं था। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने भारत को जूडो में पहले कॉमनवेल्थ स्वर्ण दिलाए। अस्मिता कॉमनवेल्थ खेलों में जूडो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने जूडो टीम को सम्मानित किया। स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत विजेता को 20 लाख रुपये और कांस्य विजेता को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
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