सोमवार, 17 अगस्त 2026HI
भारत संस्करण
भारत

छत्तीसगढ़ में 400 से ज्यादा हाथी, 16 जिलों में मौजूदगी

1988 में झारखंड से सरगुजा के रास्ते लौटे हाथी अब 9 कॉरिडोर से गुजरते हुए राज्य के 16 जिलों तक फैल चुके हैं, हमलों में अब तक करीब 1100 लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ में 400 से ज्यादा हाथी, 16 जिलों में मौजूदगी
फोटो: Muhammad Mahdi Karim Facebook The making of this document was supported by Wikimedia CH. (Submit your project!) For all · GFDL 1.2

छत्तीसगढ़ में लगभग 60 साल तक गायब रहे हाथी 1988 में सरगुजा (तत्कालीन मध्यप्रदेश का हिस्सा) के रास्ते वापस लौटे थे। तब से उनकी संख्या और दायरा दोनों लगातार बढ़ते गए हैं। अब राज्य के 16 जिलों में करीब 400 हाथियों की मौजूदगी है और वे जंगल से सटे इलाकों के साथ-साथ राजधानी रायपुर और बिलासपुर के नजदीक तक पहुंच चुके हैं। वन विभाग ने हाथियों की आवाजाही के लिए नौ कॉरिडोर चिह्नित किए हैं।

राज्य निर्माण के बाद यानी 2001 से 2026 तक हाथियों के हमलों में 972 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1988 से अब तक यह आंकड़ा करीब 1100 है। इसी दौरान 262 हाथियों की भी मौत हुई, जिनमें से 62 मौतें करंट लगने से हुईं। राज्य सरकार अब तक पीड़ितों को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा बांट चुकी है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक देश में हर साल हाथियों के हमलों में करीब 500 लोगों की मौत होती है, और छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम व पश्चिम बंगाल इससे सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। खास बात यह है कि देश के कुल हाथियों में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी महज 1 से 2 प्रतिशत है, लेकिन हाथियों के हमलों से होने वाली कुल मौतों में से 12 से 15 प्रतिशत यहीं दर्ज होती हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार 20वीं सदी की शुरुआत तक छत्तीसगढ़ के स्थानीय हाथी विलुप्त हो चुके थे। अविभाजित बिहार के पलामू और सिंहभूम क्षेत्रों में खनन परियोजनाएं बढ़ने पर हाथियों का पहला स्थायी दल 1988 में सरगुजा क्षेत्र में पहुंचा था। 1995 के बाद उनका आना नियमित हो गया और वे सरगुजा-जशपुर के रास्ते झारखंड-ओडिशा के बीच आने-जाने लगे, जिससे जशपुर को छत्तीसगढ़ में हाथियों का 'प्रवेश द्वार' कहा जाने लगा।

प्रोजेक्ट एलीफेंट की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य मंसूर खान के मुताबिक हाथियों को खदेड़ने के बजाय उनके साथ रहना सीखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि क्राउड मैनेजमेंट सबसे बड़ी कमजोरी है और हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में भीड़ को जाने से रोकना चाहिए। वन विभाग के पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ ओपी यादव ने बताया कि प्रभावित गांवों में हाथी मित्र दल बनाए गए हैं और रेडियो, 'गज संकेत' एप, वॉट्सएप व कॉल के जरिए रियल टाइम अलर्ट भेजे जा रहे हैं।

यह लेख हमारी संपादकीय नीति के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है।

छत्तीसगढ़हाथीमानव-हाथी संघर्षसरगुजाबिलासपुरवन विभागवन्यजीव
छत्तीसगढ़ में 400 से ज्यादा हाथी, 16 जिलों में मौजूदगी | Indian Dispatch